69000 शिक्षक भर्ती पर सपा ने उठाए सवाल, कहा आखिर क्यों दलितों, पिछड़ों को बाहर रखने की साजिश..

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image credit-social mediaहाईकोर्ट के आदेश के बाद यूपी में 69000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर कश्मकश जारी है. इस बीच ओवरलैंपिंग के संबंध में भी कई खबरें चल रही थी, जिसके लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 69000 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति हेतु प्रक्रिया चल रही है. लेकिन कुछ गलत प्रश्नों के आरोप में दायर की गई याचिका पर हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया है.
माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए 65 प्रतिशत तथा पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 60 प्रतिशत प्राप्तांक के आधार पर शिक्षा विभाग द्वारा लगभग एक लाख पैतालिस हजार कुल अभ्यर्थी उत्तीर्ण घोषित हुए है.
जिनकी कौंसिलिंग शैक्षिक योग्यता के आधार पर करते हुए 69000 पदों पर अंतिम रूप से मेरिट के आधार पर आरक्षण नियमों का पालन करते हुए चयन होना था.

समाजवादी पार्टी ने पहले भी सरकार को आगाह करते हुए कहा कि आरक्षण के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं आरक्षण नीति के अनुसार उच्च मेरिट वाले अभ्यर्थियों की गणना सामान्य श्रेणी में की जाती है भले वह पिछड़े वर्ग अथवा अनुसूचित वर्ग के हो, अर्थात उच्च मेरिट प्राप्त पिछड़े वर्ग व अनुसूचित वर्ग के अभ्यर्थी को सामान्य श्रेणी में स्थान प्राप्त होता है.
समाजवादी पार्टी ने इस बात की पहले भी मांग की थी कि आरक्षण नियमावली का पालन निश्चित रूप से चयन प्रक्रिया में किया जाय. इसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाय. इसके बाद चयन प्रक्रिया में आई मेरिट के बाद सपा नेताओं ने पूरी चयन प्रक्रिया पर ही सवाल उठाए हैं.
सपा नेता और एमएलसी सुनील सिंह यादव ने कहा कि 69000 भर्ती में अभ्यर्थियों का आरोप है कि पर्चा आउट कराया गया है. गलत सवाल पूछे गए. शिक्षामित्रों, दलितों, पिछड़ों को बाहर रखने की साजिश की गई है. जानबूझ कर गड़बड़ियां की गई क्योंकि सरकार ये भर्ती कराना ही नहीं चाहती. पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले.

वहीं अतुल प्रधान ने भी पूरी चयन प्रक्रिया पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि पहले एल_टी_ग्रेड वाली भर्ती , फ़िर शिक्षामित्रों के साथ विश्वासघात ओर अब 69000 भर्ती में अभ्यर्थियों का आरोप है कि पर्चा आउट कराया गया है. गलत सवाल पूछे गए! शिक्षामित्रों, दलितों, पिछड़ों को बाहर रखने की साजिश की गई है. सरकार भर्तियों के नाम पर सिर्फ़ ग़ुमराह ही करती आ रही हैं. रोजगार की तलाश में लगें लोगों के साथ इतना छल सही नही है.

 
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