ईमानदारी की मिसालः तीन बार रहे मुख्यमंत्री, मरणोपरांत इतने पैसे नही थे कि ठीक से हो सके श्राद्ध

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आज के बदले राजनीतिक परिवेश में हालत ये है कि अगर कोई पार्षद भी बन गया तो उसकी एक दो पीढ़ी आराम से रह सकती है. चार पहिया कार, महंगे मोबाइल और गहने तो आम बात हो गए हैं. ये किसी एक पार्टी या दल का हाल नहीं बल्कि स्थिती सबकी कमोबेश एक जैसी ही है.
ऐसा भी नहीं है कि सभी बेईमान हों मगर अधिकतर संख्या ऐसों की ही है. ऐसे हालात में अगर कोई आपसे ये कहे कि तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनके पास पैसे न हों तो सुनने में आश्चर्य होगा. मगर आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे ही एक राजनेता की कहानी जिसने ईमानदारी के लिए मिसाल दी जाती है.

ये हैं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री. भोला पासवान बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले थे, वो बेहद ईमानदार थे. महात्मा गांधी से प्रभावित होकर वो स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय हुए थे. गरीब परिवार से होने के बाद भी वो बौद्धिक रूप से काफी सशक्त थे.
कांग्रेस पार्टी ने उन्हें तीन बार अपना नेता चुना और वो तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे. इनकी ईमानदारी का आलम ये था कि इनके देहांत के बाद इनके खाते में इतने पैसे नहीं थे कि ठीक से इनका श्राद्ध किया जा सके. आज भी इनके परिवार की माली हालत ठीक नहीं है.
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