अगर मुझे जीना का मौका मिला तो मैं उसके लिए जिउंगा, इरफान खान ने अपनी पत्नी के लिए कहे थे ये शब्द

Share and Spread the love

फिल्म और उसके कलाकारों का मानव जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। अपनी अदाकारी से अधिकांश अभिनेता देश की जनता के दिलों मे अपना घर बना लेते हैं। ऐसे ही एक अभिनेता इरफान खान का आज मुंबई के कोकिलबेन हॉस्पिटल में इलाज के दौरान देहांत हो गया है। पेट में असहनीय दर्द होने के कारण कल ही उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था । हालांकि वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
कैंसर की बीमारी को जीत कर लंदन से भारत लौटने के बाद उन्होने एक इंगलिश मीडियम नाम की एक फिल्म भी की। जो लॉक डाउन की वजह से थियेटर में रिलीज नहीं हो सकी । कैंसर से जंग जीतने वाले इरफान खान पेट के कोलोन इनफेकशन के आगे हार गए।
हर मुश्किल में साथ देने वाली अपनी पत्नी सुतापा के जिम्मे अपने दो बच्चों बाबील और अयान को छोड़ कर चले गये । उनकी मां सईदा बेगम का भी चार दिन पहले ही जयपुर में इंतकाल हो गया था । लॉकडाउन के बीच इरफान मां के अंतिम संस्कार में नहीं जा पाए।
ऐसा लगता है कि इरफान को अपनी मौत का पहले से ही आभास हो चुका था। इसी कारण मार्च महीने में ही उसने अपनी फिल्म अग्रेजी मीडियम का ट्रेलर रेलीज़ करते हुए कहा था कि मेरे शरीर के अंदर अनवॉन्टेड मेहमान बैठे हैं। उनसे वार्तालाप चल रहा है। देखते हैं ऊंट किस कवरट बैठता है। जैसा भी होगा, आपको इतल्ला कर दी जाएगी।
कहावत है कि व्हेन लाइफ गिव्ज यू लेमन, यू मेक ए लेमनेड। बोलने में अच्छा लगता है, लेकिन सच में जब जिंदगी आपके हाथ में नींबू थमाती है तो शिकंजी बनाना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन आपके पास और चॉइस भी क्या होती है पॉजिटिव रहने के अलावा।
इरफान खान ने यह भी कहा कि इरफान ने कहा कि बीमारी के कारण मैं अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय रहा। मैंने उन्हें बढ़ता देखा। पत्नी सुतापा 24 घंटे मेरे साथ रहती हैं। हमेशा मेरा ध्यान रखतीं। अगर मुझे जीने का मौका मिला तो मैं उसके लिए जीना चाहूंगा। मैं अगर अभी तक हूं तो उसकी बड़ी वजह मेरी पत्नी है।
उनके निधन की जानकारी सबसे पहले उनके मित्र सुजीत सरकार ने ट्वीट के माध्यम से दी। उन्होने अपने ट्वीट में लिखा – मेरा प्यारा दोस्त इरफान । तुम लड़े और लड़े और लड़े । मुझे तुम पर हमेशा गर्व रहेगा । हम दोबारा मिलेंगे । सुतापा और बाबिल को मेरी संवेदनाएं । तुमने भी लड़ाई लड़ी । सुतापा इस लड़ाई में जो तुम्हें दे सकती थीं सब दिया । ओम शांति । इरफान खान को सलाम ।
इसके बाद बालीवूड ही नहीं, पूरे देश में यह समाचार मीडिया के माध्यम से फ़ैल गया। उनके प्रति लोगों ने अपनी संवेदनाए प्रकट की । जिसमें से कुछ इस प्रकार हैं – जावेद अख्तर ने कहा- इरफान से आखिरी बार लंदन में मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा था कि जल्द लौटेंगे, फिर इत्मीनान से बात होगी। उनकी अदायगी एक करिश्मा है।
बीमारी के दौरान भी काम करते रहे, ये जज्बा था उनमें। अमिताभ बच्चन ने कहा – एक अविश्वसनीय प्रतिभा, एक महान सहयोगी, सिनेमा की दुनिया के लिए एक शानदार योगदानकर्ता ने हमें बहुत जल्द छोड़ कर चला गया। रवीना टंडन ने कहा- एक शानदार कोस्टार, एक अभिनेता के रूप में उत्कृष्ट और एक खूबसूरत इंसान थे इरफान खान ।
उर्मिला मातोंडकर ने कहा – वे एक बेहतरीन कलाकार कलाकार थे। फरहान अख्तर ने कहा – इरफान खान वास्तव में एक दयालु अभिनेता थे और उन्होंने जो जादू पर्दे पर उतारा, वह अब हम नहीं देख पाएंगे। अनुपम खेर ने कहा – एक प्रिय मित्र, एक बेहतरीन अभिनेता और एक अद्भुत इंसान हमें छोड़ कर चला गया । हॉलीवुड अभिनेता टॉम हैंक्स ने उनकी सराहना करते हुए एक बार कहा था कि इरफान की आंखें भी अभिनय करती हैं।
इरफान खान मूल रूप से टोंक, राजस्थान के रहने वाले थे । यहीं पर 7 जनवरी 1967 को इनका जन्म हुआ था । इनका पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान था। पठान परिवार जन्म लेने के बावजूद इरफान बचपन से ही शाकाहारी थे। इस वजह से उनके पिता उन्हें हमेशा यह कहकर चिढ़ाते थे कि पठान परिवार में ब्राह्मण पैदा हो गया । बचपन मे इनकी रुचि दो क्षेत्रों में थी।
एक ओर तो ये क्रिकेट खिलाड़ी बनना चाहते थे और दूसरी ओर उनका रुझान कलाकार बनने के लिए भी था। जबकी इनके अब्बू यह चाहते थे कि ये पढ़ लिख कर उनका बिजनेस संभालें । इनके पिताजी टायर का व्यवसाय करते थे । बाद में पिता की अनुमति से उन्होने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमीशन लिया ।
थोड़े दिन ही बाद उनके पिता की मौत हो गई। इसके बाद उन्हें घर से पैसे मिलने बंद हो गए। शेष सारी पढ़ाई उन्होने अपने दोस्तों की मदद और मिलने वाली फ़ेलोशिप से पूरी की । इसमें उनकी तत्कालीन फ्रेंड और बाद में बनी पत्नी सुतापा ने बहुत मदद की ।
उनकी एक्टिंग स्किल गज़ब की थी। जिसे दिखाने का मौका उन्हें टीवी सीरियल श्रीकांत और भारत एक खोज में मौका मिला । इरफान खान ने अपनी क्लासमेट सुतापा सिकंदर से 1995 में शादी की । शुरू में दोनों के माता-पिता तैयार नहीं थे। लेकिन दोनों की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा ।
नेशनल स्कूल ड्रामा की पढ़ाई करने के बाद ये कुछ दिन दिल्ली में रह कर थियेटर वगैरह करते रहे। बाद में ये मुंबई आ गए । शुरू के दिनों में इन्हें बड़ी कठिनाई हुई । इसी दौरान इन्होने अपनी गर्ल फ्रेंड के सहयोग से इरफान ने दोस्तों के साथ मिलकर टेलीफिल्म बनाई जिसे देखकर फिल्मकार गोविंद निहलानी ने उन्हें काम दिया। इसके बाद इनकी एक्टिंग क्षमता की चर्चा फिल्म इंडस्ट्री में होने लगी और काम भी मिलने लगा ।
यहाँ पर उनकी कुछ बेहतरीन फिल्मों की भी चर्चा कर लेते हैं। जिसमें किए गए बेहतरीन अभिनय की वजह से वे बालीवुड में अमर हो गए । द लंच बॉक्स रितेश बत्रा के डायरेक्शन में बनी एक बेहतरीन फिल्म थी। जिसे कई अवॉर्ड्स मिले । मानवीय रिश्तों पर बनी इस फिल्म में इरफान ने एक अधेड़ विधुर आदमी का किरदार बेहतरीन तरीके से निभाया था ।
पान सिंह तोमर तिग्मांशु धूलिया के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में इरफान मशहूर ऐथलीट से डकैत बने पान सिंह तोमर का किरदार निभाया था। इस किरदार को इरफान ने इतने बेहतरीन तरीके से निभाया था कि इसके लिए इरफान को बेस्ट ऐक्टर का नैशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया था।
हासिल तिग्मांशु धूलिया की इस फिल्म में इरफान ने एक नेगेटिव किरदार निभाया था। फिल्म में रणविजय सिंह के किरदार के लिए इरफान को बेस्ट ऐक्टर इन अ नेगेटिव रोल के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। द नेमसेक झुंपा लाहिड़ी के मशहूर नॉवेल ‘द नेमसेक’ पर बनी इस फिल्म ने इरफान को इंटरनैशनल लेवल पर पहचान दिलाई थी। उनकी बेहतरीन एक्टिंग की वजह से उसे कई इंटरनैशनल अवॉर्ड मिले।
लाइफ ऑफ पाई में इरफान ने पाई का लीड कैरक्टर निभाया गया था। डायलॉग डिलिवरी और चेहरे के हाव-भाव और आंखों से ऐक्टिंग करने की कला की पूरी दुनिया कायल हो गई थी। हिंदी मीडियम फिल्म के लिए भी इरफान को बेस्ट ऐक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। तलवार में इरफान ने एक पुलिस अधिकारी भूमिका निभाई थी। यह फिल्म आरुषि मर्डर केस पर बनी थी।
पीकू फिल्म में अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण के साथ में इरफान ने राणा चौधरी का किरदार निभाया था जो पीकू से प्यार करता है। अंग्रेजी मीडियम फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ का सीक्वल थी। फिल्म को काफी तारीफ मिली और इसमें इरफान के साथ करीना कपूर, राधिका मदान और दीपक डोबरियाल जैसे कलाकार थे। लाइफ इन मेट्रो- फिल्म में इरफान ने शानदार प्रदर्शन किया था और इस प्रदर्शन की वजह से उन्हें बेस्ट एक्टर के लिए फिल्मफेयर से नवाजा गया था।
वैसे तो मैं कभी इरफान खान से मिला नहीं। लेकिन जिन्हें वे अपना एक्टिंग गुरु मानते थे। उनके साथ काम करने का मौका मिला । मुंबई के रनवे इंटरटेनमेंट प्रा. लिमिटेड के बैनर तले जब मैं शोध विभाग के अध्यक्ष रूप में महात्मा गांधी पर सीरियल में अपनी भूमिका निभा रहा था। तो उस सीरियल में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले उनके गुरु जो सीरियल में महात्मा की गांधी की भूमिका निभा रहे थे। उनसे मिलने का मौका मिला ।
उनके कारण ही कई ऐसे सह कलाकार भी उस सीरियल में काम कर रहे थे। जो इरफान पठान के साथ रहते थे। उनकी दरियादिली का फायदा उठाते थे । उनके गुरु को गाजा पीने की बुरी लत लग गई थी । इस कारण वे भी इरफान पठान की मदद पर ही निर्भर रहते थे। उनके साथ तमाम ऐसे कलाकार भी रहते थे। जो उस समय स्ट्रगल कर रहे थे ।
उन्हीं के मुख से हर दिन कोई न कोई प्रसंग इरफान खान के बारे में सुनता था। वे कहते थे कि हम लोग बिना काम के कितने दिन भी पड़े रहे। हम लोगों को कभी भी इरफान खान जाने के लिए नहीं कहते थे। यह भी नहीं कहते थे कि जाओ और कहीं काम धाम करके दो पैसे कमाओ।
बल्कि हौसला आफजाई करते थे कि संघर्ष करो। कभी न कभी मंजिल मिलेगी ही । ऐसा दरियादिल इंसान आज फिल्म इंडस्ट्री में तमाम संघर्ष करने वाले कलाकारों को छोड़ कर चला गया। वे खुद को अनाथ महसूस कर रहे हैं। सबकी ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि ।
प्रोफेसर डॉ योगेन्द्र यादव
पर्यावरणविद, शिक्षाविद, भाषाविद,विश्लेषक, गांधीवादी /समाजवादी चिंतक, पत्रकार, नेचरोपैथ व ऐक्टविस्ट
The post अगर मुझे जीना का मौका मिला तो मैं उसके लिए जिउंगा, इरफान खान ने अपनी पत्नी के लिए कहे थे ये शब्द appeared first on AKHBAAR TIMES.