यूपी के स्कूल-कालेज अभिभावकों पर बना रहें फीस का दबाव, शिक्षकों को नहीं मिल रहा वेतन, सीएम मौन क्यों?

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को कहा कि प्रदेश में गांवो औऱ छोटे कस्बों से बड़े-बड़े सपने लेकर शहरों में पढाई और नौकरी की तलाश में आने वाले छात्रों, नौजवानों को समय से मदद करने की सख्त जरुरत है, वैश्विक महामारी कोरोना के चलते खराब आर्थिक हालातों के मारे भविष्य के पास वर्तमान में कमरे का किराया, खाने-पीने और फीस देने का भी इंतजाम नहीं है.
बकौल अखिलेश विडम्बना है कि लाॅकडाउन की स्थिति में शैक्षणिक गतिविधियां यद्यपि बंद रही है तथापि तमाम स्कूल-काॅलेजों के प्रबन्धक अभिभावकों से फीस तथा अन्य खर्चे वसूलने के लिए लगाातार दबाव बनाए हुए है.
शिक्षा संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों तथा दूसरे कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री जी और उनकी टीम इलेवन इन मामलों में मौन धारण किए है. केवल प्रेस नोट जारी कर ही सरकार अपने कर्तव्य की इतिश्री मान रही है.
Image credit- social mediaसमाजवादी पार्टी की सरकार में भविष्य की पीढ़ियों को सशक्त करने के लिए उन तक लैपटाॅप पहुंचाए थे. आज भी ये लैपटाॅप चल रहे है जबकि भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में वादा करके भी मेधावी छात्र-छात्राओं को लैपटाॅप से वंचित रखा हैं.
भाजपा को अपनी सत्ता के प्रदर्शन का खासा शौक है इसलिए भाजपा ने कोरोना बीमारी पर जीत हासिल करने की जगह चुनाव की पवित्रता नष्ट करने के लिए जंगल के पेड़ों तक पर एलईडी लगवा दी. बिहार-बंगाल में भाजपा ने अपनी वर्चुअल रैली में ढाई सौ करोड़ रूपए से ज्यादा रकम क्यों अपव्यय किया?
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