मन से हैं मुलायम, इरादे हैं लोहा, ऐसे ही नहीं कहा जाता ‘नेता जी’ को, जानें कारण

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Image credit- social mediaसमाजवादी पार्टी के संरक्षक की भूमिका में मुलायम सिंह यादव को कौन नहीं जानता होगा, मुलायम सिंह यादव की दरियादिली जगजाहिर है. वे अपने पास आए किसी भी व्यक्ति को निराश नहीं करते थे. इसी क्रम में प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हाफिज सलमानी तो उनकी दरियादिली के कसीदे पढ़ते हुए नहीं थकते हैं.
हाफिज सलमानी बताते हैं कि वो साल 1985 से वो उनके घर पर बाल काटने जाया करते थे, एक दिन मुलायम सिंह यादव ने हाफिज सलमानी से कहा कि तुम कुछ मांगना चाहते हो तो मांग सकते हो. इस पर हाफिज ने उस समय हजरतगंज की जनपथ मार्केट में एक दुकान की मांग रख दी, जिसको वो पूरी ना कर सके.

हालांकि मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री बनते ही हाफिज की इस ख्वाहिश को पूरी कर दिया. साल 1988 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बनें तो उन्होंने एक सरकारी आफिस को खाली करवाकर उस समय 5 लाख की कीमत की दुकान हाफिज को भेंट की.
इसके बाद हाफिज ने वहां पर बांबे मेंस पार्लर खोला. इसकी एक ब्रांच उन्होंने जानकीपुरम में भी खोली, हाफिज की दुकान में काम करने वाले कमाल सलमानी ने बताया कि नेता जी के अलावा यहां कई आईएएस और समाजवादी नेताओं का आना जाना बना रहता है. समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बारे में एक बात कही जाती है कि वे मन से हैं मुलायम-इरादे हैं लोहा, इसका उदाहरण उन्होंने इस स्टोरी में खुद पेश किया है.
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