पीएमओ को नहीं पता पीएम केयर्स फंड में कितना पैसा आया, वेबसाइट पर भी नहीं है कोई जानकारी

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IMAGE CREDIT-SOCIAL MEDIAप्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक सकुशल पहुंचाने के लिए भारतीय रेलवे प्रत्येक व्यक्ति 50 रुपये अतिरिक्त शुल्क वसूल रही है. कर्नाटक की भाजपा सरकार ने घर लौटने वाले प्रवासी मजदूरों से दोगुना किराया लेने का एलान किया है, इसके पीछे का सरकार के द्धारा तर्क दिया गया है जिन वाहनों से ये लोग जाएंगे वे खाली लौटेंगे. अभी तक इसी पहेली की गुत्थी सुलझ पाई नहीं थी, उधर पीएम केयर्स फंड की पहेली उलझती हुई नजर आ रही है.
पीएम केयर्स फंड में लोगों ने दिल खोलकर दान दिया था. कंपनियों ने भले ही अपने कर्मचारियों को भुगतान नहीं किया हो, लेकिन पीएम केयर्स फंड में उन्होंने दान देने में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती. आलोचकों का कहना है कि ये पीएम केयर्स फंड अपारदर्शी और पक्षपाती है.

पीएम केयर्स फंड में दिए दान को कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत गिना जा सकता है, आलोचकों का आरोप है कि इसका मुख्य उद्देश्य सिर्फ पीएम की महिमा का मंडन करना है. संकट की स्थिति से निपटने और प्रभावितों को राहत देने के उद्देश्य से ये किया गया है, तो ऐसे में इस फंड का इस्तेमाल लाकडाउन में एक महीने तक बिना आजीविका के रहने वाले लाखों प्रवासियों को संकट की स्थिति से निकालने में होना चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ भी होता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है जिस कारण अब सवाल उठने लगे हैं.
हालांकि अब तक किसी द्धारा भी इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि प्रवासियों पर कितना पैसा खर्च किया गया है. या इस कोष से इनका किराया क्यो नहीं दिया जा रहा है. द टेलीग्राफ के मुताबिक इस संबंद में पूछने पर पीएमओ से जुडे एक अधिकारी ने फोन पर जवाब दिया, कि इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं.
image credit-social mediaइतना ही नही पीएम केयर्स फंड की बेबसाइट पर भी इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि अभी तक कितना पैसा इकट्ठा किया गया है. या इस पैसे का अभी तक कहां इस्तेमाल किया गया है.
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