काश! अखिलेश की एक काल इधर भी आ जाती, सपा के वरिष्ठ नेता का झलका दर्द

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IMAGE CREDIT-SOCIAL MEDIAसुल्तानपुर के वरिष्ठ समाजवादी नेता सत्यनारायन रावत ने पार्टी के वो काम किया है जिसके चलते पार्टी आज जिले में मजबूत स्थिति में हैं. पैदल, साईकिल से चलकर संगठन को मजबूत बनाने में सत्यनारायण रावत का योगदान रहा. हालांकि जवानी से लेकर बुढ़ापे तक मुलायम सिंह यादव के हमसफर रावत को सियासत से कुछ नहीं मिला, इसके बावजूद उनको इस बात का गिला नहीं हैं.
कोरोना काल में सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव कार्यकर्ताओं और सपा नेताओं से संवाद कर रहे हैं. इस बी रावत जी को भी उम्मीद जगी है कि शायद उनको भी एक काल आ जाए. 74 साल के बुजुर्ग सत्यनारायण रावत कई माह से बीमार हैं. इधर उनके ऊपर आवारा सांड ने हमला कर दिया जिससे उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई. आपरेशन के बाद वे स्वस्थ हैं.

जिस संगठन को उन्होंने अपने खून पसीने से सींचा उसी दल में विधायक, मंत्री बनकर लोग फलते फूलते हैं. लेकिन वरिष्ठ नेता की कोई सुध लेना वाला नहीं है. सूबे में जब सपा की सरकार थी तो जिले की पांचो सीटों पर सपा के विधायक थे. एमएलसी, जिला पंचायत अध्यक्ष, सहकारी बैंक अध्यक्ष के पद पर भी सपा का कब्जा था. इसके अलावा पांच लोगों को मंत्री का दर्जा दिया गया था. आज भी एक एमएलए और एमएलसी सपा के है.
लेकिन मदद तो दूर, अपवादों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश बड़े सपाई मिलने का भी वक्त निकल पाए. पूर्व विधायक अनूप संडा ही इकलौते ऐसे नेता निकले. जिन्होंने रावत को मदद दी.
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