राहुल गांधी ने की देश और विदेश के स्वास्थ्यकर्मियों बातचीत, जानें किसने क्या अनुभव साझा किए

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आज डॉक्टर्स डे है. कोरोना संकट के इस दौर में फ्रंटलाइन में मोर्चा संभाले डॉक्टर्स के लिए आज खास दिन है. हर कोई स्वास्थ्यकर्मियों को सलाम कर रहा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश और दुनिया में काम करने वाले कुछ भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों से बात की है. इस दौरान डॉक्टर्स ने अपने अनुभव साझा किए हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि हम गर्व महसूस करते हैं कि आप लोग देश के प्रतिनिधि हो. हम आपके अनुभव जानना चाहते हैं कि आप कैसे काम कर रहे हैं. ये वक्त आप सभी के लिए मुश्किल है.
इंग्लैण्ड से जुड़ी शैर्ली ने कहा कि हमारे पास हर रोज मरीज आ रहे थे, शुरुआत में काफी डर था क्योंकि किसी को कुछ पता नहीं था. जब मैं एक मरीज को देख रही थी तो उसे कोई लक्षण नहीं था, उसके सिर्फ पेट में दर्द था. जांच में उसकी चेस्ट में कोविड था.
आगे उन्होंने बताया कि वह काम कर रही हैं, इस वजह से उनके पति अब घर को संभाल रहे हैं. क्योंकि मैं घर से शिफ्ट हो गयी हूँ. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में लोग डॉक्टरों का काफी सम्मान कर रहे हैं.
केरला से विपिन ने बताया कि मुझे भी कोरोना वायरस हो गया. मैं अभी क्वारनटीन हूँ. भारत में 1.2 मिलियन एलोपेथिक डॉक्टर हैं, जबकि 3 मिलियन से अधिक नर्स हैं. लेकिन भारत में प्राइवेट और सरकारी अस्पताल में जमीन आसमान का अंतर है. प्राइवेट में ये दिक्कत है कि उनकी सैलरी कट रही है, सरकार को मदद करनी चाहिए.
उनका कहना है कि दिल्ली में पहले 7 हजार टेस्ट हो रहे थे. टेस्टिंग बढ़ाई गयी तो पॉजिटिव रेट बढ़ गया. अब फिर से टेस्टिंग कम करदी गयी है.
उन्होंने कहा कि दिल्ली में दो नर्स की डेथ हुई. दिल्ली सरकार द्वारा जो एक करोड़ रूपये देने को कहा गया वह अभी तक नहीं दिया गया. ऐसे में अगर परिवार को मदद नहीं मिलती है तो काफी दिक्कत होगी. इस पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वह सरकार को चिट्ठी लिखेंगे.
ऑस्ट्रेलिया से जुड़े नरेंद्र सिंह ने बताया कि जब कोरोना शुरू हुआ, तब हमें लगा कि ये एक सामान्य फ्लू होगा. लेकिन जब इसने लोगों की जान लेना शुरू किया, तो आर कोई हैरान हो गया. उन्होंने कहा कि अगर प्राइवेट अस्पताल में टेस्टिंग नहीं होगी, तो आगे जाकर काफी मुश्किल होगी. क्योंकि टेस्टिंग के दम पर ही आप कोरोना वायरस को ट्रैक कर सकते हैं और रोक सकते हैं.
न्यूजीलैंड से अनु ने कहा कि यहाँ ऑकलैंड जैसे शहर काफी भीड़ वाले हैं. जहां लोगों की जान जा सकती थी. पर सरकार ने काफी अच्छा काम किया.
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