उपचुनावः विधायकी छोड़ी, मंत्री पद भी नहीं मिला, अब जनता से पार पाने की चुनौती

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पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल होने वाले 22 नेताओं में से 14 तो मंत्री बन गए हैं, लेकिन आठ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने विधायक के पद को छोड़ दिया, मंत्री पद भी नहीं मिला, इसके साथ ही उनके ऊपर अब उपचुनाव जीतने की चुनौती अलग से खड़ी हो गई है.
शिवराज सरकार में सिंधिया के जिन समर्थकों को मंत्री बननने का अवसर प्राप्त नहीं हुआ उनमें साल साल 2018 में कांग्रेस की ओर से चुनाव जीते कमलेश जाटव, अशोक नगर से जजपाल सिंह जज्जी, करेरा से जसवंत जाटव, ग्वालियर पूर्व से मुन्नालाल गोयल, गोहद से रणवीर जाटव, भांडेर से रक्षा सरैनिया, मुरैना से रघुराज सिंह कंषाना और हाटपिपल्या से मनोज चौधरी है.

इनमें सिर्फ रणवीर जाटव को छोड़ दिया जाए तो सभी लोग पहली बार ही विधानसभा पहुंचे थे. लेकिन सिंधिया के प्रभाव में आकर कांग्रेस को छोड़ दिया था.
हाटपिपल्या से मनोज चौधरी ने भाजपा के दीपक जोशी को चुनाव में हराया था. पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र और पूर्व मंत्री दीपक जोशी भी बीजेपी नेतृ्त्व से खफा चल रहे हैं. अगर उपचुनाव के दौरान इन लोगों का सहयोग नहीं मिला तो मनोज को बड़ी मुश्किल होगी. ऐसा ही अन्य उम्मीदवारों के साथ भी है.
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