विकास दुबे अपने घर और बगीचे में लगाता था अदालत, तीन दिन पहले सुनाया था फरमान

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विकास दुबे अपने घर और बगीचे में बाकायदा अदालत लगाता था. जिसमें भूमि विवाद, झगड़े, बंटवारे और लेनदेन से जुड़े मामले शामिल होते थे. विकास इन मामलों में सुनवाई कर अपना फैसला सुनाता था. घटना के तीन दिन पहले तक वह अदालत लगाता रहा था. यह पुलिस की जांच में सामने आया है.
विवाद से जुड़े मसले आने पर विकास दुबे के गुर्गे ही यह पता लगाते थे कि मामले में दोष किसका है. जिसके बाद विकास अपना फैसला सुनाता था. यही कारण है कि चौबेपुर थाने में भूमि विवाद और झगड़े के मामले कम ही दर्ज होते.
आसपास के गांवों में पुलिस का आना नागवार गुजरता था 
विकास को आसपास के गांवों में भी पुलिस का आना नागवार गुजरता था. उसने ग्रामीणों से कह रखा था कि बड़े मामलों को छोड़कर अन्य मामले उसकी अदालत में ही आएंगे और निपटारा यही किया जाएगा. वह बीते 10 साल से अपनी अदालत लगा रहा था.
बिकरू के अलावा इन गांवों के लोग आते थे अदालत में
बिकरू गांव के आसपास के सुज्जा निवादा, बसेन, जादेपुर, कंजती, देवकली, तकीपुर, दिलीपनगर, मनोह, काशीराम निवादा, मदारीपुर गांवों के लोग विकास की अदालत में अपने मसले लेकर आते थे. अगर कोई जमीन विवाद का मामला लेकर पुलिस के पास पहुँचता भी था तो उसे विकास का ही फैसला मानना पड़ता था.
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