सिंधिया को हराने वाले केपी यादव ढाई साल बाद एक साथ आए नजर, क्या कहा एक-दूसरे के बारे में?

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केपी यादव उस वक्त राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गए थे जब उन्होंने लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को हरा दिया था. सूबे की सियासत ने करवट ली और सिंधिया भी भारतीय जनता पार्टी में आ गए. जिसके बाद माना गया कि केपी यादव अब हाशिये पर चले गए हैं.
सोमवार को मूंगावाली की रैली में ज्योतिरादित्य सिंधिया और केपी यादव एक साथ नजर नहीं आए थे. जिसके बाद इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गयी थी. लेकिन मंगलवार को दोनों नेता ढाई साल बाद पहली बार एक साथ एक मंच पर नजर आए.
पार्टी ने इसके जरिए एकजुटता का सन्देश देने का प्रयास किया है. अशोकनगर विधानसभा क्षेत्र की वर्चुअल रैली में राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया और बीजेपी सांसद केपी यादव एक साथ जुड़े. दोनों नेताओं ने बीजेपी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. साथ ही अपने पुराने संबंधों को भी याद किया.
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने केपी यादव की सराहना की. जबकि केपी यादव ने भी सिंधिया के सानिध्य में आगे काम करने की बात कही.
2019 के लोकसभा चुनाव में केपी यादव ने सिंधिया को गुना-शिवपुरी सीट से हराया था. एक वक्त पहले तक केपी यादव मूंगावाली जिला पंचायत में ज्योतिरादित्य सिंदिया के सांसद प्रतिनिधि हुआ करते थे. केपी ने साल 2018 में जब सिंधिया से टिकट की मांग की थी, तो कांग्रेस ने ब्रिजेश यादव को प्रत्याशी बना दिया था. जिसके बाद केपी यादव बीजेपी में शामिल हो गए थे.
बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में केपी यादव पर दांव लगाया और सफल भी हो गए. अब जब सिंधिया 22 विधायकों के साथ बीजेपी में आ गए तो केपी यादव की सियासी ताकत में कमी आई. इस बीच उनका सिंधिया को लेकर कोई बयान नहीं आया था.
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