विकास का रहन-सहन था साधारण, इन साथियों की जिंदगी थी गुलजार, हजम कर गए 18 करोड़

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कानपुर वाले विकास दुबे के साथ-साथ कई राज भी दफ़न हो गए. उस अपराध की दुनिया का भी अंत हो गया जिसके दहशत में बिकरू गांव और आसपास के इलाके के लोग जीते थे. विकास ने अपराध के जरिए कमाई दौलत से साम्राज्य खड़ा किया था. लेकिन रहन-सहन के मामले में उससे ज्यादा उसके साथी एशो-आराम में जीते थे.
सूत्रों के हवाले से मालूम हुआ है कि विकास दुबे की काली कमाई को सफ़ेद बनाने का काम जय बाजपेयी के अलावा चार अन्य मैनेजर भी करते थे. बताते हैं कि इन चारों के पास विकास दुबे के 18 करोड़ रूपये थे, जो विकास के जाने के साथ ही सीधा उनकी जेब में चले गए.
कहा जाता है कि विकास अपराध के मामले में तो शातिर था लेकिन पैसे को कहां लगाया जाए ताकि कमाई दोगुनी हो सके, इसके बारे में उसे कुछ खास पता नहीं था, इसलिए उसने इस काम के लिए बाकि लोगों को रखा था. विकास का रहन-रहन सहन लगभग साधारण था. वहीं जय के अलावा अन्य चार एशो-आराम में जिंदगी जीते हैं.
सूत्रों के मुताबिक 18 करोड़ रूपये की रकम का आधा हिस्सा ब्याज पर था, जिससे 55 लाख रूपये महीने की कमाई होती थी. इसका आधा हिस्सा विकास के पास जाता था और बाकी रकम उसके मैनेजर के पास रहती. व्यारियों और उद्यमियों के कारोबार में भी उसका पैसा लगा था. फैक्ट्री उद्यमी के नाम होती थी और पैसा विकास का होता था.
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