कोरोना मरीज ने किए अगर ये काम तो हो सकती है एक से तीन साल तक की सजा

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कोरोना वायरस महामारी ने विश्वभर को अपनी चपेट में लिया है. करीब 3-4 महीने पहले लोग इसे एक सामान्य बीमारी मान रहे थे लेकिन देखते ही देखते इस महामारी ने दुनिया के करीब सभी देशों को अपनी जद में ले लिया. कोरोना वायरस की महामारी की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है.
स्वास्थ्यकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों, सफाईकर्मियों और प्रत्येक कोरोना वारियर की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून बना दिया है. साथ ही कोरोना मरीज ने अगर खुद को छुपाया तो इसके लिए भी प्रावधान किया गया है. मुख्यमंत्री योगी की अगुवाई में उत्तर प्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं महामारी रोग नियंत्रण अध्यादेश 2020 कैबिनेट से पास हो गया है.
नए कानून के तहत स्वास्थ्यकर्मियों, सभी पैर मेडिकल कर्मियों, पुलिसकर्मियों व स्वच्छता कर्मियों के साथ व शासन की ओर से तैनात किसी भी कोरोना वारियर से की गयी अभद्रता या हमले पर छह महीने से लेकर सात साल तक की सजा का प्रावधान किया गया. साथ ही पचास हजार से लेकर पांच लाख तक का जुर्माना भी पड़ सकता है.
कोरोना वारियर्स पर थूकने या गंदगी फेंके पर व आइसोलेशन के उल्लंघन पर कार्रवाई होगी. कोरोना वारियर्स के खिलाफ समूह को उकसाने पर भी कार्रवाई की जाएगी. इसमें दो वर्ष से पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है. साथ ही पचास हजार से 2 लाख तक का जुर्माना.
क्वारटीन का उल्लंघन करने पर एक से तीन साल तक की सजा और दस हजार से एक लाख तक जुर्माने का प्रावधान. यही प्रावधान अस्पताल से भागने वालों के खिलाफ है. जबकि अश्लील और अभद्र आचरण करने पर एक से तीन साल तक की सजा और पचास से एक लाख तक का जुर्माना हो सकता. अध्यादेश के अनुसार अगर कोई कोरोना मरीज खुद को छिपाता है तो उसे एक से तीन साल तक की सजा और 50 हजार से एक लाख तक का जुर्माना लग सकता है.
कोई कोरोना मरीज अगर जानकार सार्वजानिक परिवहन के जरिए यात्रा करता है तो उसके लिए एक से तीन साल तक की सजा और 50 हजार से 2 लाख तक का जुर्माने का प्रावधान है.
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