कांग्रेस पार्टी क्या देशभर में अपने नेताओं को दे रही है एक बड़ा संदेश?

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राजस्थान में सियासी घमासान अभी थमा नहीं है. सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक दूसरे को सियासी शिकस्त देना चाहते हैं. इस बीच सचिन पायलट ने पार्टी के सामने कुछ अपनी शर्ते रखीं. कांग्रेस ने पायलट को मनाने की कोशिश की लेकिन उनकी मांगों और शर्तों पर अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया.
पार्टी ने सचिन पायलट पर एक्शन भी लिया. उप मुख्यमंत्री के पद से जहां हटाया तो वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद भी वापस ले लिया. यानि साफ़ है कि पार्टी अपने इस रुख से देशभर के अपने नेताओं को एक साफ़ सन्देश दे रही है.
अगर पार्टी लाइन से बाहर जाकर कोई नेता गतिविधि करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी फिर वह कोई भी हो. पहले कांग्रेस की ओर से सचिन पायलट को सन्देश दिया गया कि वह पहले घर लौटें. जब वह नहीं माने तो उन्हें प्रदेश अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया. इसके साथ ही उनके दो समर्थक मंत्रियों की भी कैबिनेट से छुट्टी करदी गयी.
कांग्रेस की ओर से पायलट और उनके 18 समर्थक विधायकों को नोटिस बेजा गया है. यही नहीं शुक्रवार को पायलट खेमे के दो विधायकों भंवरलाल शर्मा और विश्वेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया. साथ ही सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाते हुए मामला भी एसओजी में दर्ज करा दिया गया.
कांग्रेस ने सचिन पायलट के मामले में अपने सख्त और त्वरित फैसले से पार्टी में नेताओं को सन्देश दिया साथ ही अपनी मंशा भी जाहिर करदी.
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