बिहार में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर चिकित्सा क्षेत्र में रिक्त पदों पर तुरंत हो तैनातीः कांग्रेस

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कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों ने हमारी बीमार चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. सरकारी स्वस्थ्य सेवाओं के बारे में तो सभी जानते हैं. वहां का हाल किसी से छिपा नहीं है. शायद ही ऐसा कोई सरकारी अस्पताल हो जहां सभी पदों पर कर्मचारियों और डॉक्टरों की तैनाती हो.
बिहार में लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामलों ने अब तेजी पकड़ ली है. विपक्षी दलों के नेता सरकार से चिकित्सा क्षेत्र में रिक्त पदों पर तुरंत भर्ती कर उनकी तैनाती की मांग कर रहे हैं.
बिहार युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ललन कुमार ने कहा कि प्रदेश में लगभग 65 हजार डॉक्टरों की जरूरत है. लेकिन वर्तमान स्थिती ये है कि सरकारी अस्पतालों में लगभग 6500 डॉक्टर ही तैनात हैं. निजी क्षेत्र को भी जोड़ लिया जाए तो ये संख्या लगभग 25 हजार तक पहुंचती है.

उन्होंने मांग की है कि पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के अनुसार सूबे में अस्पतालों और डॉक्टरों की संख्या में इजाफा किए जाने की तुरंत आवश्यकता है. कांग्रेस नेता ने कहा कि मेडिकल काउंसिल के नियमानुसार लगभग 1681 लोगों पर एक डॉक्टर की जरूरत होती है, इस लिहाज से 11 करोड़ की आबादी वोल राज्य बिहार में 65 हजार 437 डॉक्टरों की जरूरत है.
ललन ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा उच्च न्यायालय को विगत दिनों दी गई जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पतालों तक के सामान्य स्वास्थ्य सेवा के तहत जनरल मेडिकल ऑफिसरों के लिए कुल 5777 पद स्वीकृत हैं जिसमें 1724 पद रिक्त हैं.
राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों के स्वीकृत पद 2775 है जिसमें 1993 पद रिक्त हैं. इसी तरह से राज्य के सरकारी मेडिकल अस्पतालों में कुल 1654 चिकित्सक शिक्षक ही कार्यरत हैं. इसमें 168 प्रोफेसर, 244 एसोसिएट प्रोफेसर, 615 असिस्टेंट प्रोफेसर, 217 ट्यूटर और 410 सीनियर रेजीडेंट हैं.
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