उर्वशी यादवः 3 करोड़ का घर, SUV गाड़ी, इसके बाद भी घर चलाने के लिए ‘छोले-कुल्चे’ बेचती है

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IMAGE CREDIT-SOCIAL MEDIAकहा जाता है किसी का भी समय एक सा नहीं रहता है वक्त के साथ-साथ वो बदलता जाता है. कभी कभी ऐसा होता है कि एक पल में जिंदगी की पूरी किताब ही पलट जाती है, कुछ ऐसा ही हुआ था गुरुग्राम में करोड़ो के घर में रहने वाली उर्वेशी के साथ जिसको समय बदलने के साथ सड़क किनारे छोले-कुल्चे बेचने पड़े.
हालांकि इस दौरान उर्वशी कती जिंदगी में कई तरह की मुश्किलें आई लेकिन उसने कभी भी विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी वो आगे बढ़ती गई. मेहनत जारी रखी और खुद पर विश्वास बनाए रखा. इसके चलते ही एक छोले-कुल्चे की की रेड़ी से शुरु हुआ सफर एक रेस्तरा पर खत्म हुआ.
उर्वशी की शादी गुरुग्राम के एक अमीर घराने में हुई थी. उनके पति अमित यादव एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में अच्छी नौकरी करते थे, घर में किसी भी चीज की कमी नहीं थी. उर्वशी अपने परिवार के साथ गुरुग्राम में बड़े ही शान जीवनयापन कर रही थी. लेकिन एक समय ऐसा आया कि उसको पाई-पाई के लिए मोहताज होना पड़ा.
31 मई 2016 का वो दिन उर्वशी की जिंदगी में काल बनकर आया. उनके पति अमित का एक्सीडेंट हो गया. एक्सीडेंट इतना खतरनाक था कि इस दौरान अमित को कई तरह की सर्जरी से गुजरना पड़ा. चोट के कारण उनको काम भी छोड़ना पड़़ा. काम छोड़ने के बाद से ही परिवार में सबकुछ बदलना शुरु हो गया. परिवार में अमित की कमाई के अलावा कोई जरिया नहीं था, बैकों में जमा पैसा भी धीरे-धीरे समाप्ति के कगार पर पहुंच रहा था.
IMAGE CREDIT-SOCIAL MEDIAइस दौरान दैनिक खर्चों ने इस परिवार की जिंदगी को एकदम बदलकर रख दिया जो शान से जीते थे आज वो ही परिवार पाई पाई के लिए मोहताज था. अब बिना पैसे के एक-एक दिन काटना मुश्किल प्रतीत हो रहा था, ऐसे में अपने परिवार और बच्चों के देखभाल के लिए उर्वशी ने काम करने की इच्छा जाहिर की.
उर्वेशी अंग्रेजी अच्छी जानती थी लिहाजा उन्हें एक नर्सरी स्कूल में टीचर की नौकरी मिल गई. स्कूल से पैसे कम मिलते थ लेकिन उनके लिए इन्हें पैसों में सभी चीजों के बंदोबस्त करने की जिम्मेदारी थी. खर्चों के ज्यादा होने से उसने सोचा कि कुछ ऐसा करते हैं कि ज्यादा पैसा कमाया जा सके जिससे परिवार को अच्छी से चलाया जा सके, पढ़ाने के बाद उर्वेशी एक कला में ही पारंगत थी जो थी खाना पकाने की कला.
लेकिन इस समय उनके पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वो दुकान खोल सके. इसके चलते उन्होंने आखिर में फैसला किया कि वो दुकान ना सही पर वो ठेला जरुर लगा सकती है. उर्वेशी ने इस बात को जब परिवार में बताया था तो सभी लोग इस काम के विरोध में थे. लोगों ने कहा कि वे एक अच्छे परिवार से हैं ऐसे में उनका यूं ठेला लगाना परिवार की प्रतिष्ठा के खिलाफ होगा.
हर कोई उनके खिलाफ था लेकिन उर्वशी इस बात को अच्छे से जानती थी कि परिवार की प्रतिष्ठा से बच्चों का पेट भरने वाला नहीं हैं. इसलिए उन्होंने सभी की बातों को दरकिनार करते हुए ठेला लगाने का फैसला किया. आज एक महिला जो कभी एसी में रहती थी बड़ी बड़ी गाडियों में घूमती थी, वक्त के पहिए ने उसे आज इस राह पर खड़़ा कर दिया जिसके बारे में उसने कभी सोचा नहीं होगा.
कड़ी धूप और बुलंद हौसले के बीच उर्वशी ने काम करना चालू किया कुछ ही दिनों में ये पूरे इलाके में प्रसिद्ध हो गया. इस दौरान लोग ना सिर्फ स्वेदशी छोले-कुलचे से नहीं बल्कि उनके लहजे से भी प्रभावित थे उन लोगों ने इससे पहले किसी इंग्लिश बोलने वाली महिला को यूं ठेला लगाते नहं देखा था. वो धीरे-धीरे गुरुग्राम के इलाके में प्रसिद्ध हो गई.
उर्वशी की मेहनत रंग लाने लगी, कुछ वक्त बीतने के बाद परिवार ने भी उनका साथ देना चालू कर दिया. आज वो दिन था कि उर्वेश ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठा लिया. सोशल मी़डिया पर ये स्टोरी जैसे ही दिखाई दी तो लोगों ने उर्वेशी के इस काम की तारीफ के साथ समर्थन भी किया, कुछ ही समय में ये ठेले ने एक रेस्तरे का रुप ले लिया.
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