उमर अब्दुल्ला नहीं लड़ेंगे विधानसभा चुनाव, राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग

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अनुच्छेद 370 निरस्त किये जाने के बाद जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश में बदल दिया गया. इससे पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला नाराज हैं. उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं हो जाता वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे.
हालांकि उमर अब्दुल्ला अपनी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए काम करते रहेंगे. उन्होंने सोमवार को कहा कि मैं राज्य की विधानसभा का नेता रहा हूं. अपने समय में यह सबसे मजबूत विधानसभा थी.
उन्होंने कहा कि अब यह देश की सबसे शक्तिहीन विधानसभा बन चुकी है और मैं इसका सदस्य नहीं बनूंगा. यह कोई धमकी या ब्लैकमेल नहीं है, यह निराशा का इजहार नहीं है. यह एक सामान्य स्वीकारोक्ति है कि मैं इस तरह की कमजोर विधानसभा, केंद्रशासित प्रदेश की विधानसभा का नेतृत्व करने के लिए चुनाव नहीं लडूंगा.
आगे उन्होंने कहा कि हम लोकतंत्र में और शांतिपूर्ण विपक्ष में विश्वास रखते हैं. वहीं चुनाव नहीं लड़ने के फैसले पर कहा कि यह मेरी निजी राय है और यह मेरा फैसला है. मेरी इच्छा के विरुद्ध कोई भी चुनाव लड़ने के लिए मुझपर जोर नहीं डाल सकता. परिसीमन कवायद के बारे में वह कहते हैं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस पिछले साल पांच अगस्त के बाद के घटनाक्रम और फैसलों को चुनौती देने के लिए सभी कानूनी विकल्पों को खंगाल रही है.
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