2022 में क्या मायावती 2007 की जीत को दोहरापाएंगी? बदल रहे समीकरण!

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उत्तर प्रदेश में विधासनभा चुनाव में अभी दो साल का वक्त है. लेकिन राजनीतिक दलों ने इसके लिए तैयारियां शुरू करदी हैं. ऐसे में राजनीतिक गलियारों में अब समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गयी है. पिछले कुछ वक्त में बसपा प्रमुख मायावती की रणनीति बदली नजर आयी है.
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश की सत्ता में ठाकुरों का दबदबा देखने को मिल रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के ब्राह्मण समुदाय में गुस्सा देखा जा रहा है. विकास दुबे के कथित एनकाउन्टर सहित अन्य घटनाओं से योगी आदित्यनाथ की सरकार की ‘ठाकुर नीति’ से ब्राह्मण समुदाय का गुस्सा भड़का हुआ है.
विकास दुबे के अलावा पांच अन्य का भी एनकाउंटर हुआ. इस सब के बीच बसपा अध्यक्ष मायावती ने 12 जुलाई को अपने एक ट्वीट में कहा कि बीएसपी का मानना है कि किसी गलत व्यक्ति के अपराध की सजा के तौर पर उसके पूरे समाज को प्रताड़ित व कटघरे में नहीं खड़ा करना चाहिए. इसलिए कानपुर पुलिस हत्याकांड के दुर्दांत विकास दुबे व उसके गुर्गों के जुर्म को लेकर उसके समाज में भय व आतंक की जो चर्चा गर्म है दूर दूर करना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि यूपी सरकार अब खासकर विकास दुबे-कांड की आड़ में राजनीति नहीं बल्कि इस संबंध में जनविश्वास की बहाली हेतु मजबूत तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई करे तो बेहतर है. सरकार ऐसा कोई काम नहीं करे जिससे अब ब्राह्मण समाज भी यहां अपने आपको भयभीत, आतंकित व असुरक्षित महसूस करे.
इस घटनाक्रम के बाद सवाल खड़ा हुआ है कि क्या ब्राह्मण समाज बीजेपी से नाराज है. साल 2007 में जब बसपा सत्ता में आई थी तब उसे पिछड़ी जातियों के अलावा अगड़ी जातियों खासतौर पर ब्राह्मण समुदाय का समर्थन हासिल हुआ था. जिसके बाद सरकार में इस समुदाय के लोगों को प्रशासन के अलावा पार्टी में भी तवज्जों मिली थी.
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