कांग्रेस का चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समझौते पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई हैरानी

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सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी और चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना के बीच समझौते पर हैरानी जताई है. साथ ही इसको लेकर दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है. बीजिंग में 7 अगस्त 2008 को हुए समझौते पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई राजनीतिक दल किसी विदेशी सरकार के साथ समझौता कैसे कर सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पहले हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है. याचिका में एनआई या सीबीआई से जांच कराने की मांग की गयी थी. चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की अगुआई में बेंच ने याचिकाकर्ता को पहले हाईकोर्ट जाने को कहा.
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने समझौते पर हैरानी भी जताई. कहा कि कैसे एक राजनीतिक पार्टी का किसी विदेशी सरकार के साथ समझौता हो सकता है, यह कानून में अनसुना है. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि समझौते के तहत मकसद ठीक नहीं है. इस समझौते को सार्वजानिक किया जाए.
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि चीन के साथ ख़राब रिश्तों के बावजूद कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार में रहते हुए एमओयू साइन किया. इस समझौते के तथ्यों और ब्योरों को सार्वजानिक नहीं किया गया.
अभी हाल ही में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन सैनिकों के बीच झड़प के बाद कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार को जमकर घेरा. जिसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस पार्टी द्वारा चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एमओयू साइन करने का मुद्दा उठाया.
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