मजदूरों की तस्वीर शेयर कर अखिलेश यादव ने कहा, जो गए थे कभी सपनों के शहर में, थक हार के…

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कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते देशभर में लगे लॉकडाउन का असर सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों और गरीब तबके पर पड़ा है. लॉकडाउन के 40 दिन बीतने के बाद सरकार ने अब मजदूरों को उनके घर पहुंचाने का काम शुरू किया है मगर सरकारी संसाधन ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की एक तस्वीर शेयर कर कहा है कि जो गए थे कभी सपनों के शहर में, थक हार के सो रहे हैं आज गांव का सपना लिए.

अखिलेश ने श्रमिक कानून में बदलाव को लेकर कहा कि मज़दूर विरोधी भाजपा सरकार ‘श्रमिक-क़ानून’ को 3 साल के लिए स्थगित करते समय तर्क दे रही है कि इससे निवेश आकर्षित होगा. जबकि इससे श्रमिक-शोषण बढ़ेगा तथा साथ में श्रम असंतोष औद्योगिक वातावरण को अशांति की ओर ले जाएगा. सच तो ये है कि ‘औद्योगिक-शांति’ निवेश की सबसे आकर्षक शर्त होती है.
इससे पहले अखिलेश यादव कह चुके हैं कि घर लौटने के लिए रास्तों में भटक रहे उप्र के मज़दूरों के लिए सरकार खाने-पीने का प्रबंध क्यों नहीं कर रही है? सरकार के दावों से सच्चाई कोसों दूर है, जैसे ये बेबस मज़दूर अपने घरों से.

मज़दूर विरोधी भाजपा सरकार ‘श्रमिक-क़ानून’ को 3 साल के लिए स्थगित करते समय तर्क दे रही है कि इससे निवेश आकर्षित होगा; जबकि इससे श्रमिक-शोषण बढ़ेगा तथा साथ में श्रम असंतोष औद्योगिक वातावरण को अशांति की ओर ले जाएगा. सच तो ये है कि ‘औद्योगिक-शांति’ निवेश की सबसे आकर्षक शर्त होती है. pic.twitter.com/3hMN2Fu1zC
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 10, 2020

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