बेटे को परीक्षा दिलाने के लिए मजदूर ने चलाई 105 Km साइकिल, आनंद महिंद्रा ने दिया ये तोहफा

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मध्य प्रदेश के धार जिले में मजदूरी कर अपना घर चलाने वाले शोभाराम ने अपने बेटे की परीक्षा के लिए 105 किलोमीटर का सफ़र साइकिल से तय किया. उनके बेटे आशीष को 10वीं के एग्जाम देने थे. यह तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई. लोगों ने उनके जज्बे की जमकर तारीफ की है.
इस तस्वीर को देखने के बाद बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने फैसला किया कि वो उनके बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे. इस पर आशीष के पिता ने महिंद्रा का आभार जताया है. सोशल मीडिया पर भी लोग उनके इस फैसले की सराहना कर रहे हैं.
आनंद महिंद्रा ने गुरुवार को ट्वीटर पर एक स्टोरी शेयर की और लिखा कि इस पिता को सलाम! जो अपने बच्चों के लिए सुनहरे भविष्य का सपना देखते हैं. यही ख्वाब एक देश को आगे बढ़ाते हैं. हमारी संस्था आशीष की आगे की पढ़ाई का खर्च उठाएगी.
दरअसल मध्य प्रदेश शिक्षा बोर्ड से आयोजित होने वाली 10वीं और 12वीं की परीक्षा में असफल होने वाले छात्रों को पास होने का एक और मौका देने के लिए राज्य में रुक जाना नहीं अभियान चला. जिसके तहत आशीष को तीन विषय में परीक्षा देनी थी. उनका एग्जामिनेशन सेंटर घर से करीब 106 किलोमीटर दूर धार के एक स्कूल में पड़ा. कोरोना संकट की वजह से बसें नहीं चल रही थीं. ऐसे में पिता ने 7 घंटे साइकिल चलाई और एग्जाम शुरू होने से 15 मिनट पहले स्कूल पहुंच गए.
चूंकि तीन विषयों की परीक्षा देनी थी, जिसके चलते उन्हें धार में रुकना भी था. ऐसे में शोभाराम अपने साथ तीन दिन के लिए रोटी की पोटली भी लाये.
शोभाराम ने कहा कि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर कुछ अच्छा बनना चाहता है. उन्होंने बताया कि वह मन्दू करीब रात 9 बजे पहुंचे थे, अँधेरा होने की वजह से साइकिल चलाना सुरक्षित नहीं था. बताया कि रात गुजारने के लिए किसी मंदिर की तलाश कर रहे थे लेकिन मंडू के दयालु लोगों ने न सिर्फ ठहरने के लिए जगह दी बल्कि खाना भी दिया.
कुछ घंटे की आराम के बाद शोभाराम और आशीष 4 बजे एग्जाम सेंटर के लिए निकल पड़े. वे गुरुवार को भोज कन्या शाला सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर पहुंचे. परीक्षा समय के ठीक 15 मिनट पहले.
अगली सुबह पिता-पुत्र के 106 किलोमीटर के सफ़र की खबर पूरे क्षेत्र में फ़ैल गयी. स्थानीय मीडिया के अलावा अफसरों ने भी उन्हें खोजना शुरू कर दिया.
ब्लॉक शिक्षा अफसर एसके वश्ने ने बताया कि 14 परीक्षा केंद्र यहां बनाए गए. हमें छात्र और उसके पिता का नाम पता था, इसलिए हमने सभी केन्द्रों पर सूचना पहुंचाई और आखिरकार वह हमें कन्या शाला में मिले.
जब आशीष का नाम पुकारा गया तो वह चौंक गया. धार के अफसर ब्रिजेश पाण्डेय ने बताया कि हमने सरकारी होस्टल में उनके रहने और खाने की व्यवस्था करवाई. परीक्षा पूरी होने के बाद उन्हें वापस घर जाने के लिए साधन उपलब्ध करवाया जाएगा.
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