प्रवासी मजदूरों को दो माह तक मिलेगा 5 किलो गेंहू-चावल, अगस्त से होगा एक देश एक…

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आर्थिक पैकेज के ऐलान के बाद आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि छोटे किसानों, प्रवासी मजदूर, स्ट्रीट वेंडर्स, छोटे कारोबारियों के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं. उन्होंने कहा कि तीन माह लोन मोरेटोरियम सुविधा के साथ तीन करोड़ किसानों ने कुल 4.22 लाख करोड़ रूपये के एग्रीकल्चर लोन के लिए आवेदन किया. किसानों को ब्याज पर सहायता दी गयी है. साथ ही 25 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड को मंजूरी दी गयी है.
कृषि क्षेत्र में मार्च और अप्रैल में 63 लाख कर्ज मंजूर किए गए, जो करीब 86,600 करोड़ रूपये के हैं. वहीं वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य सरकारों को अनुमति दी गयी है कि वे आपदा के लिए रकम का इस्तेमाल कर प्रवासी मजदूरों के लिए खाने और रहने का इंतजाम करें. ये राज्यों का अधिकार है कि वह इसे कैसे इस्तेमाल करें.
जो शहरी बेघर गरीब हैं, उनके लिए केंद्र सरकार व्यवस्था कर रही है. जिसके लिए 11 हजार करोड़ रूपये दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि 13 मई तक मनरेगा के तहत 14.62 करोड़ व्यक्तियों को काम दिया गया. अब तक इस पर 10 हजार करोड़ रूपये खर्च किए गए हैं. 1.87 लाख ग्राम पंचायतों में 2.33 करोड़ लोगों को काम दिया गया.
सरकार सभी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन तय करने का प्रयास कर रही है. न्यूनतम वेतन का लाभ लगभग 30 फीसदी कर्मचारी उठा पाते हैं. उन्होंने बताया कि राशन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आठ करोड़ प्रवासी मजदूरों के लिए सरकार 3500 करोड़ रूपये का प्रावधान कराने जा रही है, जो नेशनल फ़ूड सिक्यूरिटी में नहीं आते, या जिनको राज्यों का राशन कार्ड नहीं मिल पाता, उनके लिए यह प्रावधान किया गया है.
प्रति व्यक्ति 5-5 किलो गेंहू या चावल मिलेंगे. साथ ही प्रति फैमिली एक किलो चना अगले दो महीने तक मिलेगा. इसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है. रेडी लगाने वाले, पटरी पर सामान बेचने वाले, घरों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए 5,000 करोड़ रूपये की क्रेडिट फैसिलिटी दी जाएंगी. प्रति व्यक्ति को 10 हजार रूपये तक की सुविधा मिल सकती है.
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