साइकिल चुराने वाले ने चिठ्ठी लिखकर बयान किया अपना दर्द, कहा मैं मजबूर हूं और मजदूर भी, पढ़ें…

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मां-बाप के लिए औलाद की खुशी आगे कोई चीज मायने नहीं रखती, बच्चे की खुशी के लिए वो सही गलत भूलकर कुछ भी करने को तैयार हो जाता है. ऐसी ही एक घटना राजस्थान के भरतपुर में घटी जिसके बाद लोग ये सोचने पर मजबूर हो गए कि लॉकडाउन की वजह लोग किस कदर परेशानी में हैं.
हुआ कुछ यूं कि राजस्थान से बरेली जाने के लिए एक शख्स ने साइकिल चुराई और वहां पर एक पत्र लिखकर छोड़ दिया. उस पत्र में उसने अपनी पूरी व्यथा बयान की. उसने अपना नाम मोहम्मद इकबाल लिखा और बताया कि किस वजह से उसने साइकिल चुराई है.
उसने लिखा कि नमस्ते जी, मैं आपका कसूरवार हूं, आपकी साइकिल लेकर जा रहा हूं, हो सके तो मुझे माफ कर देना, मेरे पास कोई साधन नहीं है, मेरा एक विकलांग बेटा है, वो चल नहीं सकता, उसके लिए मुझे साइकिल चोरी करनी पड़ रही है. हमें बरेली तक जाना है. मैं मजदूर भी हूं और मजबूर भी.

राजस्थान के साहब सिंह ने सुबह जब देखा की बरामदे में साइकिल नहीं है तो उन्होंने खोजबीन शुरू की, काफी ढूंढने के बाद जब साइकिल नहीं मिली तो वो वापस आ गए. बरामदे में झाड़ू लगाते समय उन्हें कागज का एक छोटा सा टुकड़ा मिला. जब उन्होंने उसे खोलकर देखा तो उनके होश उड़ गए.
उन्होंने कहा कि वो पत्र पढ़कर मेरा गुस्सा समाप्त हो गया और हमें ये खुशी हो रही है कि मेरी साइकिल किसी मजबूर इंसान के काम आ गई. साहब सिंह ने बताया कि बरामदे में और भी बहुत सी कीमती वस्तुऐं पड़ी थी मगर साइकिल के अलावा कोई और चीज गायब नहीं हुई.
इसलिए जिसने भी साइकिल चुराई है वो वाकई में बहुत मजबूर मगर एक खुद्दार इंसान था. उन्होंने कहा कि वो अपने बच्चे के साथ अपनी मंजिल तक सकुशल पहुंच जाए हम इसकी कामना करते हैं.
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