तो क्या इस वजह से सोनिया गांधी की बैठक में शामिल नहीं हुईं सपा और बसपा?

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कोरोना संकट की वजह से भारतीय राजनीति में आई ख़ामोशी के बाद अब फिर से हलचल तेज हो गयी है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार को घेरने के लिए शुक्रवार को विपक्षी दलों की बैठक की. हालांकि इस बैठक से उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख पार्टियों समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने दूरी बना ली.
बसपा सुप्रीमों मायावती कई मौकों पर विपक्ष की बैठकों में अपने प्रतिनिधि के तौर पर राज्यसभा सदस्य और बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा को भेजती रही हैं. लेकिन इस बार उन्होंने विपक्षी दलों की इस बैठक से दूरी बना ली.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी इस तरह की बैठकों में पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव को पार्टी प्रतिनिधि के तौर पर भेजते रहे हैं. पर इस बार सपा का कोई प्रतिनिधि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक में शामिल नहीं हुआ.
प्रियंका गांधी की सक्रियता तो वजह नहीं?
कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन के बीच कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश में अपनी सक्रियता से न सिर्फ योगी सरकार बल्कि सपा और बसपा को भी बेचैन किया है. प्रियंका गांधी ने लगातार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखे.

साथ ही वह ट्वीट कर सरकार को सवालों के कटघरे में खड़ा करती रहीं. जिसके चलते वह लगातार सुर्ख़ियों में रहीं. श्रमिकों के लिए 1000 बसों की उनकी पेशकश से सरकार और कांग्रेस के बीच खूब खींचतान भी देखने को मिली. भले ही योगी सरकार ने यूपी में बसों की एंट्री न होने दी पर इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस और प्रियंका गांधी चर्चा का विषय बनी रहीं. इस पूरे सीन में सपा-बसपा कहीं नहीं थीं.
इससे पहले भी प्रियंका गांधी सोनभद्र मामला हो या उन्नाव का वह अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही हैं. वहीं बसपा प्रमुख मायावती कांग्रेस पर सवाल करने से इस दौरान नहीं चूकीं.
इन सब बातों को मद्देनजर रखते हुए राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सपा और बसपा ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक में इसलिए हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस उनके लिए चुनौती बनती जा रही है.
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