राहुल गांधी के सामने छलका मजदूरों का दर्द, कहा-सरकार से एक रुपया नहीं मिला

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प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी केंद्र सरकार पर निशाना साधते रहे हैं. लॉकडाउन की वजह से बड़ी संख्या में मजदूर अपने गृह राज्य पैदल ही जाते दिखाई दिए थे. इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 16 मई को सुखदेव बिहार फ्लाईओवर के पास मजदूरों से बातचीत की थी.
आज सुबह कांग्रेस के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो साझा किया गया. जिसमें प्रवासी मजदूरों के दर्द को बयां किया गया है. वीडियो में राहुल गांधी मजदूरों से बातचीत करते नजर आ रहे हैं.
क्या कुछ कहा मजदूरों ने?
झांसी के रहने वाले एक मजदूर कहते हैं कि 120 किलोमीटर चले हैं. रात में रुकते-रुकते आगे बढ़े. मजबूरी है कि हमलोगों को पैदल जाना है. इस बीच एक महिला कहती हैं कि बड़े आदमी को दिक्कत नहीं है. हम तीन दिन से भूखे मर रहे हैं. बच्चा भी है हमारा साथ में वो भी तीन दिन से भूखा प्यासा है.
एक अन्य महिला अपना दर्द बताती हैं कि जो भी कमाया था पिछले दो महीने में ख़त्म हो गया है. इसलिए अब पैदल ही घर निकल पड़े हैं. राहुल गांधी एक मजदूर से पूछते हैं कि वो कहा से आ रहे हैं और क्या करते थे. इस पर शख्स बताता है कि वह हरियाणा से आ रहे हैं और कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करता था. बताया कि एक दिन पहले ही उसने चलना शुरू किया. उनके साथ उनका पूरा परिवार है.
राहुल गांधी ने कि उन्हें लॉकडाउन के बारे में कब पता चला. इस पर शख्स ने बताया कि एकाएक लॉकडाउन के बारे में मालूम चला. जहां रहते थे वहां किराए में 2500 रूपये देने पड़ते थे. इसलिए अब वो झांसी जा रहे हैं. राहुल गांधी ने पूछा कि पैसे हैं पास में, खाना खा रहे हो? इस पर बताया कि लोग रास्ते में उन्हें खाने के लिए दे देते हैं. कई बार मिलता है तो कई बार नहीं भी.
एक शख्स ने बताया कि 21 तारिख की शाम को पता चला कि 22 मार्च को भारत बंद है. हमें लगा कि एक दिन का गैप है. चार दिन के बाद फिर सब कुछ बंद हो गया. इस पर राहुल गांधी ने कहा कि अगर पता होता कि चार दिन बाद फिर से सब बंद होने वाला है तो क्या करते?
इस पर कहा कि घर निकल जाते. पिछले दो महीने से घर से पैसे मंगवा रहे हैं. घर वाले गेंहू बेच कर हमें पैसा भेज रहे हैं उसी से गुजारा हो रहा है. हमने तीन लॉकडाउन तक तो इंतजार किया लेकिन अब लगा पता नहीं आगे क्या होगा इसलिए घर निकल पड़े.
राहुल गांधी ने पूछा कि वापस आएंगे? तो जवाब में शख्स ने कहा कि फिलहाल तो जान बचाने की सोच रहे हैं बस. आर्थिक मदद के सवाल पर कहा कि 500-1000 मिलने की बात तो सुनी लेकिन हमें कुछ भी नहीं मिला. आज हम खाने-पीने तक के मोहताज हो गए हैं. एक रूपये तक की हमें मदद नहीं मिली.
वहीं एक महिला कहती है कि मोदी सरकार में तो कुछ पता ही नहीं चलता. एक दिन ऐसे ही नोटबंदी के बारे में रातोरात मालूम पड़ा, अगली सुबह सबकुछ बंद. कोरोना के दौरान भी ऐसा हुआ. झेलना हमलोगों को पड़ता है.
महिला परेशानी को बयां करते हुए कहती है कि सरकार का भरोसा ही नहीं है, पहले एक दिन का कहा, अब फिर 15 दिन के लिए. ऐसे में दिक्कत होती है. एक ही बार बता दें, भले ही पांच साल के लिए बंद कर दें. कुछ भी होता है गरीब लोगों को दिक्कत होती है. बड़े लोगों को कोई दिक्कत नहीं होती.
अकाउंट में एक रुपया नहीं आया 
एक महिला ने कहा कि सरकार अगर 500 रूपये दे भी रही है तो उसमें क्या होता है. हमलोगों के अकाउंट में तो एक रुपया भी नहीं आया. सरकार कुछ लोगों की मदद करती है और कह देती है सबकी मदद की. अगर सबको मदद मिलेगी तो वो बताएंगे नहीं कि उन्हें मदद मिली है.
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